Rahu or ketu ke prbhav se kaise hota hai nuksaan

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Rahu ka nuksaan dene ka tarika

ज्योतिष के अनुसार Rahu की महादशा 18 वर्ष की होती है, जबकि केतु की महादशा 7 वर्ष की रहती है । अक्सर लोगो को Rahu की महादशा में ही परेशान होते देखा है, जबकि राहु की बजाए केतु की महादशा ज़्यादा कष्ट देने वाली रहती है । राहु की 18 वर्ष की महादशा उतना परेशान नहीं करती जितना Ketu की 7 वर्ष की महादशा परेशानी देती है ।

kaaran

* इसका कारण है, Rahu जब भी बुरे फल देगा यह व्यक्ति को बाहर की और ले जाता है, लोगो के साथ मेल जोल होता है, कोई ना कोई नया दोस्त जीवन मे आता है जिस के माध्यम से व्यक्ति नुकसान उठाता है । जबकि ketu जब भी बुरे फल देता है तो व्यक्ति खुद के मन की दुविधा की वजह से गलत फैसले लेता है और नुकसान उठाता है , इस लिहाज से केतु की स्थिति ज़्यादा नुकसान देने वाली साबित होती है ।

* Rahu जब भी बुरे फल देगा, व्यक्ति खुद मुसीबत के पास चल कर जाता है, किसी न किसी बाहरी व्यक्ति की वजह से उस को किसी ऐसे offer की प्राप्ति होती है जिस की वजह से उसको नुकसान होता है । जबकि केतु की दशा में offer खुद व्यक्ति के पास आता है, और व्यक्ति मन की दुविधा की वजह से सही और गलत की पहचान नहीं कर पाता ।
* राहु से व्यक्ति की बुद्धि भृमित होती है जबकि केतु से व्यक्ति का मन भर्मित होता है ।



* राहु का अस्त्र केतु है, Rahu हमेशा ketu का प्रयोग करता है, केतु व्यक्ति का comfort zone है, बड़ो का आशीर्वाद है , बड़ो का सानिध्य है , और राहु इन्ही सब से व्यक्ति को दूर कर देता है, और व्यक्ति अपनो से दूरी बढ़ा कर बाहर वालो की सुनता है । जबकि केतु का अस्त्र राहु है , और Rahu व्यक्ति की निपुणता है , इस लिए केतु की दशा में व्यक्ति को खुद की निपुणता पर संदेह होने लगता है और सफलता के shortcut तरीके में लग जाता है ।

जैसे कि Newspaper घर मे आई, उस मे लाटरी के बारे में सुना, या किसी रिश्ते या नौकरी के बारे में सुना , और उसी की और व्यक्ति लग जाता है , या फिर internet के माध्यम से विदेश जाने की add देखी , agent को पैसे दे दिए, बाद में पता चले कि यह धोखा हो गया है ।

Ketu ke nuksaan dene ka tarika

* तो ऐसे सभी वाक्य जिन में offer खुद चल कर आये, और नुकसान हो जाए, यह बुरे केतु के फल होते हैं । लेकिन जिन में व्यक्ति खुद बाहर जाए, लोगो से मिले , और बनाये गए दोस्त विश्वासपात्र न हो, ऐसे वाक्य राहु की वजह से होते हैं ।
* कहने का अर्थ, मंज़िल राहु और केतु की एक ही रहती है , सिर्फ रास्ते अलग होते हैं । जैसे कि 12वा घर विदेश का है, अगर राहु है तो व्यक्ति खुद विदेश जाने का इच्छुक रहेगा, खुद ही प्रयास करेगा और विदेश जाकर नुकसान उठाएगा । जबकि 12वे भाव मे केतु होने पर बैठे बिठाये कोई add देखी, और पैसे उस agent को दे दिए, और बाद में पता चले कि विदेश जाना भी नही हुआ और पैसे भी चले गए । इस लिहाज से ketu अपनी अशुभता ज़्यादा देता है ।

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